ब्रह्मचर्य का स्वाभाविक नष्ट होना और स्वयं ब्रह्मचर्य का नाश करना, इन दो बातों में अंतर है। यदि अपने हाथ के द्वारा कोई क्रिया ना हो या किसी कुसंग के द्वारा कोई क्रिया ना हो और स्वाभाविक ब्रह्मचर्य नष्ट हो, तो यह ऐसा है जैसे दाल में उफान निकल जाता है। ऐसे वह वीर्य का उफान होता है, उसे ब्रह्मचर्य का नष्ट होना नहीं माना जाता। अगर आप किसी क्रिया के द्वारा ब्रह्मचर्य नष्ट कर रहे हैं तब तो आपको रोकना ही होगा।
इस से बचने के लिए आप कुछ उपाय कर सकते हैं, जैसे कि: नित्य कुछ किलोमीटर दौड़ लगाना, दो-चार लीटर पानी पीना, पेट साफ रखना, नहाने के समय पेट पर ठंडा पानी डालना, नित्य प्राणायाम और व्यायाम करना, सात्विक आहार लेना और गंदी फ़िल्में ना देखना। यदि ये सब किया तो आपका ब्रह्मचर्य पक्का हो जाएगा। अपने हाथ से अगर ब्रह्मचर्य नष्ट किया जाए तो फिर शरीर को इसका अभ्यास हो जाता है। इसे आपको ही छोड़ना पड़ेगा। इससे बचने के लिए कोई जादू-मंत्र नहीं है, यह नियम तो आपको ही लेना पड़ेगा।
हस्तमैथुन के बाद बुरा लगता है, पर कुछ समय बाद फिर गलती हो जाती है।
स्वाभाविक ब्रह्मचर्य क्षय होने से किसी को ग्लानि (guilt) नहीं होती। ज्यादा ग्लानि तब होती है जब हम नियम धारण करना चाहते हैं, पर नहीं कर पाते। तब हमें अंदर से परेशानी होती है। जब हम पहली बार कोई ग़लत काम करते हैं, तो हमारे अंदर जो सत् परमाणु होते हैं, वो हमारे हृदय में दुख का अनुभव करवाते हैं। लेकिन हम बार-बार जब कोई ग़लत काम करते हैं तो हमारे अंदर असत् परमाणु अधिक हो जाते हैं, फिर ऐसा लगता ही नहीं कि हमने कोई ग़लत काम किया हो। वो आपको अपने दिनचर्या (routine) का हिस्सा लगने लगता है।
ब्रह्मचर्य पर महत्व ना होने के कारण ही आपसे यह गलती बार-बार हो रही है। हमें जहाँ से क्लेश और अशांति मिल रहे हों, हम वह कार्य कभी नहीं करेंगे। लेकिन हमको सुख मिल रहा है, हमें ऐसा आभास हो रहा है, इसलिए हम उसे बार-बार करते हैं। इसमें क्या सुख है? जैसे एक नई जगह खुजली हुई हो, और हम उसे खुजलाते रहें, बस उतने मात्र ही सुख के लिए तुम अपने ब्रह्मचर्य का नाश कर रहे हो। तुम्हें इसे रोकना होगा, थोड़ा सहना होगा।
ब्रह्मचर्य एक तपस्या है
ग़लत आदतों को रोकने और काम भाव को सहने के लिए नाम जप करें। नियमित रूप से योगासन का भी अभ्यास करें। ब्रह्मचर्य एक तपस्या है, यह कोई साधारण चीज़ नहीं है। अगर यह साधारण बात होती तो हर कोई आसानी से ब्रह्मचर्य से रह लेता। यह एक तपस्या है। ब्रह्मचर्य से रहने के लिए रोज़ाना प्राणायाम और व्यायाम बहुत ज़रूरी है। किसी भी स्थिति में ब्रह्मचर्य भंग नहीं करना चाहिए। गृहस्थी में जाने के बाद केवल संतान उत्पत्ति के लिए यह अनिवार्य विषय है। लेकिन जब तक ऐसी स्थिति नहीं आती, तब तक पूर्ण ब्रह्मचर्य से रहें।
यह केवल अभ्यास के द्वारा हो सकता है। गलत अभ्यास हमारे जीवन को नष्ट कर देता है। क्या हम सही अभ्यास से धीरे-धीरे गलत आदतों पर शासन नहीं कर सकते? बिलकुल कर सकते हैं। पर हम बहुत जल्दी हार मान लेते हैं। जब आपका मन गलत सलाह देता है, उस समय आप सावधान नहीं होते। उस समय आप उस ग़लत क्रिया में सुखद वृत्ति करके क्रिया कर लेते हैं। उसके बाद आपको होश आता है, फिर आप मन से ग्लानि करते हैं कि मैंने ऐसा क्यों किया, मैंने तो नियम लिया था। यही सुख की भावना हमें नष्ट करती है।
काम पर विजय प्राप्त करने के उपाय
काम पर विजय प्राप्त करने के लिए वैराग्य और अभ्यास के द्वारा भगवद् नाम का जप करें, सत्संग सुनें और भगवद् चरित्रों को पढ़ें। इसके साथ-साथ योगासन का अभ्यास करें और नियमित रूप से प्राणायाम भी करें। आपको अपने हाथों पर शासन करना होगा। गंदी फ़िल्में ना देखें और ग़लत लोगों का संग ना करें।
गलत सलाह से बचें
आपको ग़लत सलाह देने वाले बहुत लोग मिलेंगे जो कहेंगे ब्रह्मचर्य नाश करना आपके लिए अच्छा है, इससे तनाव (stress) kam होता है, वगैरह। आप खुद सोचें, एक बार ब्रह्मचर्य क्षीण होने के बाद आपको शारीरिक और मानसिक परेशानी होती है कि नहीं? हर तरह से होती है। चाहे डॉक्टर कहें, चाहे मित्र कहें, वो गलत उपदेश देते हैं। स्वाभाविक ब्रह्मचर्य क्षीण होने में जो वीर्य नष्ट होता है वो संतान उत्पत्ति करने वाला वीर्य नहीं होता। संतान उत्पत्ति करने वाला वीर्य ख़ुद ग़लत क्रिया करने से ही नष्ट होता है। यह जो आपके मित्र हैं, ऐसे जो आपके वास्तविक शत्रु हैं।
ब्रह्मचर्य हीनता के कारण होने वाले अन्य पाप
इस आदत की वजह से और भी पाप होते हैं। दूसरी माताओं-बहनों के प्रति आपकी दृष्टि खराब हो जाएगी। आप झूठ बोलने लगेंगे। सबसे ज्यादा पाप काम से ही होता है। काम से ही क्रोध होता है, काम से ही लोभ होता है। अगर हमारी कामना के अनुसार कुछ ना हो तो हम हिंसा भी कर देंगे। कामी पुरुष ही तो हिंसा करता है। कामना ही तो हिंसा कराती है। गृहस्थी में रहकर, धर्म-पूर्वक तरीक़े से, संतान उत्पत्ति के लिए, एक पत्नी के प्रति भाव रखकर जब काम का सेवन किया जाता है तो भगवान ने भी उसे धर्म बताया है। अगर आप 20-25 वर्ष तक ब्रह्मचर्य रहें और फिर गृहस्थी में केवल संतान उत्पत्ति के लिए काम भोगें तो आपको ब्रह्मचारी ही माना जाएगा। ऐसा व्यक्ति कभी शक्तिहीन नहीं होगा। पर आजकल लोग बचपन से ही ग़लत आदतों में पड़कर अपना नाश कर रहे हैं, आपको इस सब से बचना चाहिए।
मार्गदर्शक: श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज